फिर ओस की बूंदे बिखर रही चहुँ ओर कुहासा छाया है..पर मिलने तुम नही आई फिर ओस की बूंदे बिखर रही चहुँ ओर कुहासा छाया है..पर मिलने तुम नही आई
राकेश सी अवस्थी की ताज़ा उर्दू ग़ज़ल जिसमे हल्क़े फुल्के अल्फ़ाज़ का इस्तेमाल किया गया है राकेश सी अवस्थी की ताज़ा उर्दू ग़ज़ल जिसमे हल्क़े फुल्के अल्फ़ाज़ का इस्तेमाल किया गया...
...एक अरसा मेरे सीने में ख़ंजर रखना. दूर रहो मर्ज़ ए इश्क़ से, समझाते हैं दुनिया के ठेकेदार, मेरी गु... ...एक अरसा मेरे सीने में ख़ंजर रखना. दूर रहो मर्ज़ ए इश्क़ से, समझाते हैं दुनिया...
ये इश्क़ है जनाब इसे हम और आप कब समझा पायें हैं। ये इश्क़ है जनाब इसे हम और आप कब समझा पायें हैं।
कहानी जो आज भी जीवंत है कहानी जो आज भी जीवंत है